औषधीय पौध उद्यान

होम्योपैथिक भेषजसंहिता प्रयोगशाला परिसर के लगभग 0.3 हेक्टेयर क्षेत्र में होम्योपैथिक औषधीय पौंधों का एक छोटा उद्यान स्थित है जिसमे कृषि-प्रौद्योगिकियों के आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके स्थानिक और विदेशी प्रकृति के लगभग 75 से अधिक औषधीय पौधों को उगाया जाता है।
भारत में लगभग 1500 से अधिक बड़े-छोटे और सूक्ष्म होम्योपैथिक दवा निर्माता होम्योपैथिक दवाईयों जैसे मदर टिंक्चर, पोटेंसी, बायो-केमिक आदि का निर्माण कर रहे हैं। लगभग 80% से अधिक दवाएं वानस्पतिक स्रोतों से प्राप्त होती हैं, जिनमें से 60% पौधे विदेशी मूल के हैं। भारतीय दवा निर्माता या तो इन पौधों को विदेशों से आयात कर रहे हैं या दवाओं के निर्माण के लिए बैक-पोटेंसीज़ विदेशों से आयात कर रहे हैं। दवाओं के निर्माण के लिए कच्चे माल की अनुपलब्धता के कारण, मिलावटी या घटिया कच्चे माल के उपयोग की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं। औषधीय पौध उद्यान की उपज का उपयोग होम्योपैथिक दवाओं के गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है ताकि मिलावट या घटिया वनस्पति स्रोत के उपयोग की जांच की जा सके। औषधीय पौध उद्यान की उपज संग्रहालय के संदर्भ उद्देश्यों के लिए भी संरक्षित की जाती है। औषधीय पौध उद्यान से उत्पन्न होने वाले बीज उपयोग के लिए जर्म प्लास्म में संरक्षित किए जाते हैं।
होम्योपैथिक कॉलेज के छात्रों को उनके पाठ्यक्रम के अनुसार एचपीएल तथा अन्य विद्वानों के एचपीएल के दौरे के दौरान उद्यान का उपयोग औषधीय पौधों के प्रदर्शन के उद्देश्य से किया जाता है। उद्यान होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों की उचित वर्गीकरण और पहचान के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है।